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Sarva Pitru Shanti Puja

सर्व पितृ शांति पूजा

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    Head of Family Name and Gotra with the Names of Pitra or Ancestors will be chanted during the Puja Sankalp during Shraddh

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    You can choose to offer Bhojan and Dakshina to Brahmans in Ujjain during Shraddh

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    You can choose to offer Vastra to Brahman in Ujjain during Shraddh

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    उज्जैन सिद्धवट में श्राद्ध और तर्पण पूजा की रिकॉर्डेड वीडियो का लिंक आपको भेजा जाएगा

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    श्राद्ध पूजा संकल्प के समय, परिवार के मुखिया के साथ पितृ के नाम और गोत्र का उच्चारण किया जाएगा

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    आप ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा भेंट अर्पण करने का भी चयन कर सकते है

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    आप ब्राह्मण को वस्त्र भेंट करने का भी चयन कर सकते है

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Sarva Pitru Shanti Puja +

Brahman Bhojan

सर्व पितृ शांति पूजा + ब्राह्मण भोजन

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Sarva Pitru Shanti Puja +

Brahman Bhojan +

Vastra Offerings

सर्व पितृ शांति पूजा +

ब्राह्मण भोजन +

वस्त्र भेंट

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Wednesday, 14 September, 2022

Pitru Tarpan, Pind Daan and Shraddh Puja | Dev Ghat Vishnupad Temple, Gaya

बुधवार, 14 सितंबर 2022

पितृ तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध पूजा | देव घाट विष्णुपद मंदिर, गया

Saturday, 10 September, 2022

Shraddh Purnima Puja in Ganga Ghat, Haridwar

शनिवार, 10 सितंबर 2022

हरिद्वार में श्राद्ध पूर्णिमा पूजा

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Started by IIT graduates, DevDarshan is Devotional Platform for 5000+ Hindu Temples in the Indian Subcontinent. DevDarshan’s long term vision is to provide a digital platform to Temples and Gurus for sharing the millennia-old teachings of Indian culture in the world and by doing so, projecting Bharat (India) as Vishwa Guru (Universal Leader) through its rich cultural and spiritual heritage.


DevDarshan facilitates online Daily Darshan, Pujas and Digital Donations for Devotees. DevDarshan has onboarded 150+ Temples across 16 states including but not limited to Jyotirlinga Ghushmeshwar Nath Temple (Pratapgarh), Jyotirlinga Mamleshwar (Omkareshwar), Kaal Bhairav Mandir (Ujjain), Chintaman Ganesh Mandir (Ujjain), Tapkeshwar Mandir (Dehradun), Pashupati Nath Mandir (Haridwar), Shaktipeeth Chamunda Devi (Kangra), Shaktipeeth Maa Bajreshwari Devi (Kangra), Shaktipeeth Maa Baglamukhi Mandir (Kangra), Shaktipeeth Maa Vindyavasini Mandir (Mirzapur), Shaktipeeth Maa Harsiddhi Mandir (Ujjain), Shaktipeeth Maa Gadkalika Mandir (Ujjain), Bijasan Mata Mandir (Indore), Kalkaji Mandir (Delhi), Durgiana Mandir (Amritsar), Maa Mundeshwari Temple (Bihar), Vrindavan Chandrodaya Temple, Badi Kali ji Mandir (Lucknow), Nagvasuki Mandir (Prayagraj), ISKCON (Vrindavan), ISKCON (Ghaziabad), ISKCON (Srinagar).


You can find more details about DevDarshan and our team.

IIT स्नातकों द्वारा आरम्भ किया गया,देवदर्शन, भारत के 5000+ हिंदू मंदिरों के लिए आध्यतमिक मंच है। देवदर्शन का दृष्टिकोण हिंदू मंदिरों और गुरुओं को एक डिजिटल मंच प्रदान करना जहाँ वे भारत की आध्यात्मिक शिक्षा एवं हिंदू जीवन शैली का प्रसार कर सके और पूरे विश्व को विश्वगुरु भारत की महान संस्कृति व विरासत का ज्ञान दे सके। देवदर्शन पर मंदिर दर्शन, पूजा बुकिंग और डिजिटल दान की सुविधा उपलब्ध है।


देवदर्शन मंच के साथ 16 राज्यों में स्थित 150+ मंदिर जुड़े हुए है: ज्योतिर्लिंग घुश्मेश्वर नाथ (प्रतापगढ़), पशुपति महादेव मंदिर (हरिद्वार), ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर (ओंकारेश्वर), काल भैरव मंदिर (उज्जैन), चिंतामन गणेश मंदिर (उज्जैन), टपकेश्वर मंदिर (देहरादून), जगन्नाथ पूरी, शक्तिपीठ चामुंडा देवी (कांगड़ा), शक्तिपीठ मां बजरेश्वरी देवी (कांगड़ा), शक्तिपीठ मां बगलामुखी मंदिर (कांगड़ा), शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी मंदिर (मिर्ज़ापुर) , शक्तिपीठ मां हरसिद्धि मंदिर (उज्जैन), शक्तिपीठ मां गडकलिका मंदिर (उज्जैन), बिजासन माता मंदिर (इंदौर), कालकाजी मंदिर (दिल्ली), माँ मुंडेश्वरी मंदिर (बिहार), वृंदावन चंद्रोदय मंदिर, बडी काली जी मंदिर (लखनऊ), नागवासुकी मंदिर (प्रयागराज) आदिदेवदर्शन और हमारी टीम के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त कर सकते हैं।आप।

Live Streaming or the recorded video of Pitra Tarapn Puja will be available during Shraddh.


Live Streaming or the recorded video of Pitra Dosh Nivaran Puja will be available on DevDarshan App , which you can download on your Android Smartphone. Live Streaming will also be available on DevDarshan YouTube Channel and DevDarshan Facebook page. More details will be shared with you via whatsapp and email once you register for the Puja.


Your Name and Gotra with the names of Pitra will be chanted during the Puja in Gaya so that the souls of your ancestors can attain peace and you can receive their blessings.

श्रद्धालु पितृ तर्णप पूजा की लाइव स्ट्रीमिंग अथवा रिकॉर्डेड वीडियो देख सकते हैं।


पूजा की लाइव स्ट्रीमिंग अथवा रिकार्डेड वीडियो देवदर्शन ऐप में उपलब्ध होगी, जिसे आप इस लिंक के माध्यम से अपने एंड्रॉयड स्मार्टफ़ोन पर डाउनलोड कर सकते हैं।


पूजा की लाइव स्ट्रीमिंग अथवा रिकॉर्डेड वीडियो देवदर्शन यूट्यूब चैनल और देवदर्शन फेसबुक पेज पर भी उपलब्ध होगी। पूजा के लिए पंजीकरण करने के पश्चात, और अधिक जानकारी व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से आपके साथ साझा की जाएगी।


आपका नाम और गोत्र एवं आपके पितरो का नाम एवं गोत्र पूजा में संकल्प के दौरान लिया जाएगा ताकि आपके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिले और आप उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

The Amavasya of Bhadrapada month (August-September) is called Sarva Pitru Moksha Amavasya. This auspicious occasion is dedicated to the ancestors. On Bhadrapada Amavasya, you can perform Shraddh for all your ancestors. Lord Vishnu has assigned Amavasya Tithi, especially to Ancestors. On this day, all the ancestors are worshipped and prayed for their salvation. The special significance of Sarva Pitru Amavasya has been given in Hindu religious texts because it is the most significant of all the 12 Amavasya Tithis of the year. On the Amavasya of Bhadrapada, by donating water and performing Shraddh, Tarpan, and Pind Daan for the ancestors, they feel contented and shower blessings.


On this Tithi, the Sun and the Moon are in the same Zodiac and moreover both these celestial bodies are related to our Ancestors. Ancestors again go back to their Pitra Lok on Sarva Pitru Amavasya and before returning, they bless their descendants with Happiness, Wealth and Prosperity. They are satisfied with the Puja and hence shower their blessings on all family members.


You can perform Shraddh for any of your ancestors on Amavasya Tithi. Shraddh can be performed for the ancestors of both the maternal and paternal sides. Any person can perform a Shradh of his father, mother, grandfather, grandmother, brother, sister, maternal grandfather and grandmother, maternal and paternal uncle, mother's sister, son or daughter on Amavasya Tithi.


पितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। यह त्यौहार पितृों को समर्पित है। इस दिन आप अपने सभी पितृों का श्राद्ध कर सकते हैं। अमावस्या तिथि पर पितृों का अधिकार भगवान विष्णु द्वारा दिया गया है। इस दिन सभी पितृों का श्राद्ध करके उनके मोक्ष की प्रार्थना की जाती है। हिंदू धर्म ग्रंथों में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि सालभर की सभी 12 अमावस्या तिथियों में यह सबसे खास होती है। इस तिथि पर पितरों के लिए जल दान, श्राद्ध, तर्पण, व पिंडदान करने से वे पूरी तरह तृप्त हो जाते हैं। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। ये दोनों ग्रह पितरों से संबंधित हैं। इस तिथि पर पितृ पुन: अपने लोक में चले जाते हैं और इसके पहले अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। वे पूजा से संतुष्ट होते हैं, तो परिवार के सभी लोगों पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं।


अमावस्या तिथि पर अपने किसी भी पितृ का श्राद्ध आप कर सकते हैं। अपने पिता पक्ष या ननिहाल पक्ष के पितृों का श्राद्ध किया जाना चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने पिता, मां, दादा, दादी, पिता के भाई, बहन, नाना, नानी, मामा, मामी, मां की बहन, स्वयं के भाई, बहन, पुत्र या पुत्री का श्राद्ध अमावस्या तिथि पर कर सकता है। इस तिथि पर किया गया श्राद्ध सर्वथा शुभकारक होता है।


During Mahalaya, which is also known as Pitru Paksha, for the peace of the ancestors’ souls and for all the upcoming auspicious celebrations and happiness in the house, Nandi Shraddh is performed. If in the upcoming year, there is birth of a child, marriage or you started a new business or job, or any of the auspicious celebration is upcoming, then before those occasions, Nandi Shraddh should be performed. During Shraddh Puja, ancestors’ blessings are received. They are present at all such special family functions and occasions to bestow their special blessings.

महालय यानी पितृ पक्ष के दौरान सर्व पितृ की शांति के साथ घर में आने वाले समय में मांगलिक कार्य और खुशियां प्राप्त करने के लिए नांदी श्राद्ध कर्म किया जाता है। यदि घर में आने वाले साल में किसी बच्चे का जन्म होना हो, शादी का मुहूर्त हो, वास्तु पूजा हो या कोई भी शुभ काम होना हो, तो उससे पहले नांदी श्राद्ध कर्म किया जाना चाहिए। इससे पितृों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वे उस शुभ काम में स्वयं उपस्थित होकर अपने परिवार पर विशेष आशीर्वाद बरसाते हैं।

First, a 'Sankalp' is performed by chanting the name and gotra of the main head of the family (preferably male). Then, a Sankalp will be performed by chanting the names of the 12 dead ancestors of the family. In case you don’t remember all of your ancestors’ names, Pandit ji will chant a holy name instead of their names.


Ganesh Pujan and Vishnu Pujan will take place.


A ritual will be performed in which six earthen pots (Kalash) representing six Gods (Brahma, Vishnu, Shiva, Yamraj, Pret and reincarnation of Lord Vishnu) will be worshipped.


This is followed by the performance of 5 types of "Tarpan." Tarpan is performed by taking some Puja Samagri in the palm and then pouring them into a brass plate during which Mantras will be chanted by Pandit ji.


The first one is "Dev Tarpan"in which rice and water will be offered to the Lord. Then "Rishi Tarpan" is done in which barley(oats) and water will be offered to our dead sages. The third one is "Manushya Tarpan" in which barley(oats) and water will be offered to human beings. Then comes the "Yam Tarpan" in which sesame seeds and water will be offered to Yamraj. The final one is "Pitra Tarpan" in which sesame seeds, water, milk, ghee and honey will be offered to our dead ancestors.


This will be followed by the ritual of Pind Daan. There are 16 types of Pind in which 15 of them represent the Gods and the one represents our dead ancestors. The 'Pinds' are prepared from rice flour and Puja will be performed in front of them.


The final ritual is that of donation in which people donate food and clothes to Brahmans in the names of their dead ancestors.


Make sure you chant one of these two mantras while participating in Pitra Dosh Nivaran Puja and Shraddh in Dev Ghat to pacify the souls of the departed ones


"Om Devatabhyah Pitrabhyah Mahayogibhyeh cha,

Namah swaha swadhyaye cha nityamev namah"


“Om Shreem Sarva Pitra Dosha Nivarana Klesham Han Han Sukh Shanti Om Dehi Phat Swaha”

सबसे पहले, परिवार के मुखिया (अधिमानतः पुरुष) के नाम और गोत्र का उच्चारण करके संकल्प किया जायेगा। फिर परिवार के पितरों के नाम का उच्चारण करके संकल्प किया जाएगा। यदि आपको अपने सभी पूर्वजों के नाम याद नहीं हैं, तो पंडित जी उनके नामों की जगह एक पवित्र नाम का जाप करेंगे।


संकल्प के पश्चात, में क्रमश: गणेश पूजन और विष्णु पूजन होगा।


एक अनुष्ठान किया जाएगा जिसमें छह देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, शिव, यमराज, प्रेत और भगवान विष्णु के अवतार) का प्रतिनिधित्व करने वाले छह कलश की पूजा की जाएगी।


इसके बाद 5 प्रकार के तर्पण होंगे। हथेली में पूजा सामग्री लेकर और फिर उन्हें पीतल की थाली में डालकर तर्पण किया जायेगा, जिसके दौरान पंडित जी द्वारा मंत्रों का जाप किया जाएगा।


सबसे पहले, देव तर्पण होगा जिसमें भगवान को चावल और पानी की भेंट अर्पण की जाएगी। फिर ऋषि तर्पण किया जायेगा जिसमें हमारे मृत ऋषियों को जौ और जल की भेंट अर्पण की जाएगी। इसके पश्चात, मनुष्य तर्पण होगा जिसमें मनुष्य को जौ और जल की भेंट अर्पण की जाएगी। फिर यम तर्पण होगा जिसमें यमराज को तिल और जल की भेंट अर्पण की जाएगी। अंतिम पितृ तर्पण होगा जिसमें हमारे मृत पूर्वजों को तिल, पानी, दूध, घी और शहद की भेंट अर्पण की जाएगी।


इसके पश्चात, पिंडदान का अनुष्ठान होगा। 16 प्रकार के पिंड होंगे जिनमें से 15 देवताओं का प्रतिनिधित्व करेंगे और एक हमारे मृत पूर्वजों का प्रतिनिधित्वकरेगा। पिंड चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं और उनके समक्ष पूजा की जाएगी।


अंतिम अनुष्ठान दान का होगा जिसमें लोग अपने मृत पूर्वजों के नाम पर ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा दान कर सकेंगे।


पितृ दोष निवारण पूजा में भाग लेते समय इन दो मंत्रों का जाप अवश्य करें ताकि दिवंगत लोगों की आत्मा को शांति मिल सके।


ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।

नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।।


ऊँ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय कलेशम् हं हं सुख शांतिम् देहि फट स्वाहा: |

Brahman Bhojan is a ritual performed for the departed souls of ancestors. Brahman bhoj is done to satisfy the desires of the souls of our ancestors and let them rest in peace. Brahman Bhoj rituals help cleanse all the sins of our forefathers and help their souls to attain moksha. Also, the one who performs this ritual is said to earn good karma and is liberated from bad Karmas of past and present life.

ब्राह्मण भोज पूर्वजों की दिवंगत आत्माओं के लिए किया जाने वाला अनुष्ठान है। ब्राह्मण भोज हमारे पूर्वजों की आत्माओं की अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। ब्राह्मण भोज हमारे पूर्वजों को उनके पापों से मुक्त करने के लिए किया जाता है और उनकी आत्माओं को मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता हैं। साथ ही, जो ये अनुष्ठान करवाता है, उसको पुण्य प्राप्त होता है और अतीत और वर्तमान जीवन के बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है।

In case, you don't know your Gotra, add your caste during the registration process for Puja. In case you don’t know that, add your full name during the registration process. These details would be chanted by Pandit ji during Puja. Feel free to contact us at +919015367944

यदि आपको अपना गोत्र पता नहीं है, पूजा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान अपनी जाति लिखे। यदि ,आप यह भी नहीं जानते तो, पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान अपना पूरा नाम लिखे। इन विवरणों का पंडित जी द्वारा पूजा के दौरान जाप किया जाएगा। आप हमसे यहाँ पर समपर्क +919015367944 कर सकते है।

DevDarshan has family packages available for Puja. Please contact us at +919015367944 via a call or WhatsApp for the family package.

देवदर्शन में पूजा के लिए पारिवारिक पैकेज उपलब्ध हैं। परिवार पैकेज के लिए कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से +919015367944 संपर्क कर सकते है।

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