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Dakshineswar Kali Temple

दक्षिणेश्वर काली मंदिर


Dakshineswar, Kolkata, West Bengal 700076

दक्षिणेश्वर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल 700076

Dakshineswar Kali Temple दक्षिणेश्वर काली मंदिर

Description

A temple with great history and cultural significance, Dakshineswar Kali Temple is a Hindu Temple situated on the eastern banks of Hooghly River in Dakshineswar. The presiding temple deity is Maa Bhavatarini, an aspect of Maa Kali who is a form of Adi Shakti. The temple was built by Rani Rashmoni in 1855. Rani Rashmoni was a philanthropist and a devotee of Maa Kali. The temple is known for its association with Ramakrishna and Ma Sarada Devi, mystics of 19th Century Bengal.

महान इतिहास और सांस्कृतिक महत्व वाला मंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर दक्षिणेश्वर में हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित एक हिंदू मंदिर है। मंदिर देवी माँ भवतारिणी, माँ काली के एक रूप को समर्पित है जो आदि शक्ति का रूप है। इस मंदिर का निर्माण रानी रश्मोनी ने 1855 में करवाया था। रानी रश्मोनी एक परोपकारी रानी थी और माँ काली की भक्त थीं। यह मंदिर रामकृष्ण और माँ शारदा देवी से भी सम्बंधित है।

Temple Story

In 1847, Rani Rashmoni wanted to go on a long pilgrimage to the sacred Hindu city of Kashi to express her devotions to the Divine Mother. So she planned to travel in 24 boats carrying all the necessities and relatives and servants. According to legend, the night before the pilgrimage began, Rashmoni had a vision of the Divine Mother in the form of goddess Kali in a dream and reportedly said,.. "There is no need to go to Banaras. Install my statue in a beautiful temple on the banks of the Ganges river and arrange for my worship there. Then I shall manifest myself in the image and accept worship at that place." Profoundly affected by the dream, Rani immediately looked for and purchased a 30,000-acre plot in the village of Dakhineswar. The large temple complex was built between 1847 and 1855. Ramakrishna was responsible for bringing much in the way of both fame and pilgrims to the temple.Rani Rashmoni lived for only five years and nine months after the inauguration of the temple. She fell seriously ill in 1861. Realizing that her death was near, she decided to hand over the property she had purchased in Dinajpur (now in Bangladesh) as a legacy for the maintenance of the temple to the temple trust.

1847 में रानी रश्मोनी दिव्य माँ के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करने के लिए पवित्र हिंदू शहर काशी की यात्रा पर जाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने अपने रिश्तेदारों और नौकरों को ले जाने वाली 24 नौकाओं में यात्रा करने की योजना बनाई। किंवदंती के अनुसार, तीर्थयात्रा शुरू होने से पहले, रशमोनी को सपने में देवी काली के रूप में दिव्य माँ के दर्शन हुए और देवी ने उन्हें कथित तौर पर कहा, "बनारस जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। गंगा नदी के तट पर एक सुंदर मंदिर में मेरी मूर्ति स्थापित करें और वहां मेरी पूजा की व्यवस्था करें। तब मैं स्वयं को मूर्ति में प्रकट करुँगी और उस स्थान पर पूजा स्वीकार करुँगी।" सपने से प्रभावित होकर, रानी ने दक्षिणेश्वर गाँव में 30,000 एकड़ का एक प्लाट खरीदा। बड़ा मंदिर परिसर 1847 और 1855 के बीच बनाया गया था। मंदिर के उद्घाटन के बाद रानी रश्मोनी केवल पांच साल और नौ महीने तक जीवित रहीं। वह 1861 में गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। यह महसूस करते हुए कि उनकी मृत्यु निकट थी, उन्होंने मंदिर ट्रस्ट को मंदिर के रखरखाव के लिए विरासत के रूप में दिनाजपुर (अब बांग्लादेश) में खरीदी गई संपत्ति को सौंपने का फैसला किया।

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Maa Bhabatarini Sandhya Aarti March 20, 2021

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